Tuesday, August 16, 2022
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कहानी
बिना धार की तलवार ; प्राची खुराना

तेरा लिखना तो न्यायालय के उस न्यायाधीश के उस निर्णय की तरह है

वसंत पंचमी ;पुष्पा पाण्डेय

प्रेम को मुखर होना भी उतना ही आवश्यक है

ढाई आखर प्रेम का; पुष्पा पाण्डेय

जीव तो जीव, वनस्पति भी इस प्रेम का आलिंगन करती है। धरती पीली चूनर की आड़ में मुस्कुराती है।

चाँद न सही सितारे तो जगमगाएँगे ; सीमा सिन्हा मैत्री

कोई चले ना चले चलता जा,
हिम्मत जुटा आगे बढ़ता जा।

कहानी ::: वंशवेल; सुनीता श्रीवास्तव जागृति

राघव के भी आंखों में नींद कहां थी बैठक के सोफे पर बैठकर अपने अंतर्मन के युद्ध को शांत करने की कोशिश कर रहा था।

झूठ और सच

गले लगाते हुए बोली#डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्ला
प्राथमिक शिक्षक एवं साहित्यकार, कानपुर नगर उत्तर प्रदेश

जिंदगी से एक मुलाकात

हमारे बस में कुछ भी नहीं है दीपा , हम सब तो भगवान के हाथ की कठपुतली हैं।कब किसे कैसे नचाना है ये तो उन्ही पर निर्भर है।

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