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राज्य

इंदिरा मार्केट में मिलेंगे प्राकृतिक खेती उत्पाद

हिमालयन अपडेट ब्यूरो | December 02, 2019 06:23 PM
 
 
 मंडी जिला प्रशासन प्रदेश सरकार की सोच को जमीन पर उतारने को लेकर पहल करने में एक बार फिर आगे रहा है। राज्य सचिवालय शिमला के बाद मंडी में प्रदेश का दूसरा शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पाद विक्रय केंद्र खुला है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार हर जिले में शून्य लागत प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए बिक्री केंद्र खोलने पर जोर दे रही है। मंडी जिला प्रशासन ने इसमें पहल करते हुए इंदिरा मार्केट परिसर में बिक्री केंद्र खोला है। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने सोमवार को ‘आजीविका विक्रय केन्द्र’ के नाम से स्थापित इस केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके नगर परिषद की अध्यक्ष सुमन ठाकुर भी मौजूद रहीं।
इस अवसर पर ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जिला में यह विक्रय केन्द्र राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत खोला गया है। इसका उद्देश्य शून्य लागत प्राकृतिक खेती में लगे किसानों को प्रोत्साहन देना और लोगों को केमिकल स्प्रे व दवाईयों से मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाना है। आजीविका विक्रय केन्द्र के जरिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पादों की बिक्री के लिए उचित मंच मिलेगा।
जिले में 3770 किसान कर रहे प्राकृतिक खेती
उपायुक्त ने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती के माध्यम से मंडी जिला के 3770 किसान कुल 262 हैक्टयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसके लाभ व शून्य लागत को देखते हुए और किसान भी इसे अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
क्या है शून्य लागत प्राकृतिक खेती
इस कृषि पद्धति में देसी गाय के गोबर व गो मूत्र तथा स्थानीय पेड़ पौधों की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है। रासायनिक खाद व कीटनाशकों का उपयोग न करने के कारण इसे जहरमुक्त खेती भी कहा जाता है।
खिले किसानों के चेहरे...कहा रंग लाएगा ये प्रयास
अजीविका विक्रय केंद्र में अपने उत्पाद लेकर पहुंचे प्राकृतिक खेती किसानों ने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और जिला प्रशासन का आभार जताया। केंद्र में फूलगोभी, मटर और टमाटर लेकर आए घराण के दिनेश कुमार, धनिया और बंद गोभी लेकर आए सैण आलथू के कैप्टन हुकुमचंद और बलवीर ठाकुर ने एक स्वर में इस प्रयास को किसान हितैषी बताते हुए इसकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे पिछले दो साल से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, इस कें्रद के खुलने से उन्हंे अपने उत्पादों को बेचने के लिए सही स्थान मिला है।
वहीं अपनी 35 बीघा जमीन पर प्राकृतिक खेती करने वाले बल्ह के चौकी चंदराहण के किसान ओपी शर्मा, जो विक्रय केंद्र में फूल गोभी, शिमला मिर्च, मूली व पालक लेकर आए थे, ने विश्वास भरे लहजे में कहा कि किसानों की मदद का ये प्रयास जरूर रंग लाएगा। हमें तो इससे लाभ होगा ही और लोग भी अब प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए आगे आएंगे।
विक्रय केंद्र में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों भी मिलेगा मंच
उपायुक्त ने कहा कि आजीविका विक्रय केंद्र पर स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी बेचे जाएंगे। इसके लिए अभी विकास खंड सदर में ‘नैना खंड स्तरीय फेडरेशनञ का गठन किया गया है, जिसमें 50 ग्राम संगठन शामिल किए गए हैं, जिनके तहत 762 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके उत्पादों को भी यहां पर बेचा जाएगा। जल्द ही जिलास्तर पर इसी प्रकार से एक वृहद फेडरेशन का गठन किया जाएगा।
इससे स्वयं सहायता समूहों के हस्त निर्मित उत्पादों को उपयुक्त मार्केटिंग प्लेटफार्म मिलेगा। इसके लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने ‘नैना खंड स्तरीय फेडरेशनञ के साथ एमओयू साईन किया है, जिसके तहत इस संगठन की दो महिला सदस्य आजीविका विक्रय केंद्र पर सामान बिक्री का काम देखेंगी।
इस मौके अतिरिक्त उपायुक्त आशुतोष गर्ग, कृषि विभाग के उपनिदेशक जीत सिंह, डीआरडीए के परियोजना अधिकारी नीवन शर्मा सहित अन्य अधिकारी, इंदिरा मार्केट व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान अशोक शर्मा सहित अन्य लोग उपस्तिि रहे।
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