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2 घंटे के अंतराल में बच्चों को दें ऊपरी आहार: वीरेंद्र आर्य

हिमालयन अपडेट ब्यूरो | December 14, 2019 02:55 PM
कुल्लू - पोषण अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला के उपरांत जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र आर्य के साथ ाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला/खंड पोषण समन्वयक, वृत पर्यावेक्षक व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।
 
पोषण अभियान को लेकर कार्यशाला आयोजित
कुल्लू,
 6 माह से अधिक आयु के बच्चों को मां के दूध के अतिरिक्त ऊपरी आहार देना अति आवश्यक है क्योंकि बच्चे की वृद्धि और बढ़ोतरी के लिए मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं होता है। यह जानकारी आज शनिवार को कुल्लू में पोषण अभियान के अंतर्गत आयोजित की गई एक दिवसीय कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र ंिसह आर्य ने दी। वीरेंद्र सिंह आर्य ने कार्यशाला में उपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, जिला/खंड पोषण समन्वयक, वृत पर्यावेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नवजात शिशुओं और 6 माह वर्ष के बाद जिन बच्चों को अतिरिक्त आहार शुरू करना है उनका विशेष ध्यान रखने के लिए उनकी माताओं को भी जागरूक करें। उन्हें यह भी बताएं कि दिन में उस बच्चे को कम से कम 6 बार भोजन अवश्य करवाएं तथा डेढ-दो घंटे के अंतराल में ऊपरी आहार देना सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि मां का दूध भी कम से कम दो साल तक बच्चे को पिलाना आवश्यक है। यदि घर का दूध बच्चे को पिलाना हो तो निप्पल, बोतल का प्रयोग न करें। बच्चों को कटोरी, गिलास या चम्मच से भी ऊपरी दूध पिलाएं क्योंकि बच्चों को 14 प्रतिशत के लगभग बीमारियां निप्पल, बोतल से दूध पिलाने से होती हैं। बच्चे के जीवन के पहले 2 वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बच्चों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को सभी प्रकार के साग-सब्जियां, फल इत्यादि भी उसके भोजन में सम्मिलित करनी चाहिए ताकि बच्चे को संतुलित आहार मिल सके। डिब्बा बंद चीजों का सेवन बच्चे को न करवाएं तो बहुत अच्छा है। घर की बनी हुई चीजों को मसल कर लगातार खिलाते रहें। उक्त भोजन में घी/तेल की मात्रा का होना भी जरूरी है। क्योंकि यह बच्चों के उम्र के हिसाब से सर्वांगीण विकास में मदद करता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र ंिसह आर्य ने कार्यशाला में उपस्थित सभी सहभागियों से आह्यन किया कि पोषण अभियान के अंतर्गत बच्चों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखने के लिए उनके अभिभावकों को भी घर-घर जाकर अवगत करवाएं ताकि हमारे बच्चे कुपोषण व अनिमिया से ग्रसित न हो। समय-समय पर सभी बच्चों का वजन भी लें ताकि उनकी पोषण स्थिति के बारे में जानकारी मिलती रहे। 
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