Sunday, September 27, 2020
Follow us on
-
धर्म संस्कृति

शैमरॉक रोजेंस स्कूल के बच्चों ने क्रिसमस बड़े धूमधाम के साथ  मनाया 

हिमालयन अपडेट ब्यूरो | December 22, 2019 03:27 PM
 
 
शिमला,
 
राजधानी शिमला के कच्चीघाटी के समीप पत्रकार विहार शैमरॉक रोजेंस स्कूल के बच्चों ने क्रिसमस बड़े धूमधाम के साथ  मनाया।  स्कूल की प्रधानाचार्य प्रीति चुट्टानी ने बच्चों को बताया कि  क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार है। ईसाई समुदाय के लोग इस त्योहार को बहुत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह त्योहार हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था।
उन्होंने बताया कि जीसस क्राइस्ट एक महान व्यक्ति थे और उन्होंने समाज को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने दुनिया के लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया था। इन्हें ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। उस समय के शासकों को जीसस का संदेश पसंद नहीं था। उन्होंने जीसस को सूली पर लटका कर मार डाला था। ऐसी मान्यता है कि जीसस फिर से जी उठे थे।
उन्होंने बताया कि क्रिसमस के दिन ईसाई लोग अपने घर को भलीभांति सजाते हैं। क्रिसमस की तैयारियां पहले से ही होने लगती हैं। लगभग एक सप्ताह तक छुट्टी रहती है। बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। घर और बाजार रंगीन रोशनियों से जगमगा उठते हैं।
उन्होंने बताया कि चर्च में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। लोग अपने रिश्तेदारों एवं मित्रों से मिलने उनके घर जाते हैं। सभी एक-दूसरे को उपहार देते हैं। इस दिन आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। इसकी विशेष सज्जा की जाती है। इस त्योहार में केक का विशेष महत्व है। मीठे, मनमोहन केक काटकर खिलाने का रिवाज बहुत पुराना है। लोग एक-दूसरे को केक खिलाकर पर्व की बधाई देते हैं। सांताक्लाज का रूप धरकर व्यक्ति बच्चों को टॉफियां-उपहार आदि बांटता है।
ऐसा कहा जाता है कि सांताक्लाज स्वर्ग से आता है और लोगों को मनचाही चीजें उपहार के तौर पर देकर जाता है।
क्रिश्चियन समुदाय के लोग हर साल 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस का त्योहार मनाते हैं।
क्रिसमस का त्योहार ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि क्रिसमस क्रिश्चियन समुदाय का सबसे बड़ा और खुशी का त्योहार है, इस कारण इसे बड़ा दिन भी कहा जाता है।
क्रिसमस के 15 दिन पहले से ही मसीह समाज के लोग इसकी तैयारियों में जुट जाते हैं।
घरों की सफाई की जाती है, नए कपड़े खरीदे जाते हैं, विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं।
इस दिन के लिए विशेष रूप से चर्चों को सजाया जाता है।
क्रिसमस के कुछ दिन पहले से ही चर्च में विभिन्न कार्यक्रम शुरु हो जाते हैं जो न्यू ईयर तक चलते रहते हैं।
उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों में प्रभु यीशु मसीह की जन्म गाथा को नाटक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। मसीह गीतों की अंताक्षरी खेली जाती है, विभिन्न प्रकार के गेम्स खेले जाते है, प्राथनाएं की जाती हैं आदि।
कई जगह क्रिसमस के दिन मसीह समाज द्वारा जुलूस निकाला जाता है। जिसमें प्रभु यीशु मसीह की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं।
कई जगह क्रिसमस की पूर्व रात्रि,  रिजाघरों में रात्रिकालीन प्रार्थना सभा की जाती है जो रात के 12 बजे तक चलती है। ठीक 12 बजे लोग अपने प्रियजनों को क्रिसमस की बधाइयां देते हैं और खुशियां मनाते हैं।
क्रिसमस की सुबह गिरिजाघरों में  विशेष प्रार्थना सभा होती है।
क्रिसमस का विशेष व्यंजन केक है, केक बिना क्रिसमस अधूरा होता है।
इस दिन लोग चर्च और अपने घरों में क्रिसमस ट्री सजाते हैं।
सांताक्लॉज बच्चों को चॉकलेट्स और गिफ्ट्स देते हैं।
इस दिन अन्य धर्मों के लोग भी चर्च में मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते हैं।
सांताक्लाज ने शैमरॉक रोजेंस स्कूल के बच्चों को दिए उपहार दिए ।
Have something to say? Post your comment
और धर्म संस्कृति खबरें
"उचिया धारा भोला बसया" भजन यूट्यूब पर रिलीज, यूट्यूब पर काफी फेमस हो रहा भजन आयोध्या में रामचन्द्र मंदिर निर्माण के आधारशिला के सुअवसर पर मडावग बाजार में दौड़ रही ख़ुशी की लहर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी मुस्लिम समुदाय को ईद-उल-जुहा की बधाई श्रावण मास में रूद्राभिषेक का महत्त्व पजाई मेले के अवसर पर ‘पहाड़ी बोली संस्कृति उत्थान समूह' फेसबुक पेज पर ऑनलाइन “नाचा माणूओ नाचा” प्रतियोगिता का आगाज शादी समारोह करें लेकिन धाम, डीजे और नाच-गाने की अनुमति नहीं- चेत सिंह मां शूलिनी की शोभा यात्रा निर्विघ्न संपन्न करना सभी के लिए हर्ष का विषय 21 जून को कुरुक्षेत्र में नहीं होगा सूर्यग्रहण मेलाः डीसी  जाने आज का पंचांग व राशिफल जाने आज का पंचांग एवं राशिफल