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विशेष

प्लास्टिक को जीवन में ना अपनाएँ, आओ सब मिलकर इस धरती को बचाएं......

अजय विशिष्ट | January 19, 2020 10:58 AM



"यदि हम पर्यावरण का संरक्षण करेंगे, तो पर्यावरण हमारा संरक्षण करेगा ।" यदि समय रहते हमने इसका संरक्षण नहीं किया तो धरती पर हमारा अस्तित्व संभव नहीं होगा।

 शिमला ,
प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है इससे ऐसे जहरीले पदार्थ निकलते हैं जो ना केवल मानव के स्वास्थ्य के को ही प्रभावित नहीं करते बल्कि जानवर भी इसके दुष्प्रभावों से अछूते नहीं है हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2009 से प्लास्टिक थैलों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है जिसके बाद प्रदेश में काफी हद तक राहत देखने को मिली पॉलीथिन हटाओ पर्यावरण बचाओ अभियान 2009 के अंतर्गत पॉलिथीन एवं प्लास्टिक इकट्ठा कर लगभग 175 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया अब आवश्यकता है कि एक बार प्रयोग होने वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करके हम प्लास्टिक पर पूर्ण विजय प्राप्त करें । प्लास्टिक का जिस तरह हमारे देश व प्रदेश में प्रयोग होता है उसके काफी दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं औसतन प्रत्येक भारतीय के पास प्रतिवर्ष आधा किलो प्लास्टिक कचरा इकट्ठा हो जाता है ।देश में प्लास्टिक उत्पादन 1.60 करोड़ टन प्रति वर्ष है इसमें हर वर्ष 10% से भी अधिक बढ़ोतरी दर्ज हुई है इसका अधिकांश भाग कूड़े के ढेर पर और इधर-उधर बिखेरने से पर्यावरण में प्रदूषण फैल रहा है ।हिमाचल प्रदेश में लगभग 2 टन प्लास्टिक कचरा रोजाना पैदा होता है, जिसके निष्पादन के लिए सरकार के सतत प्रयासों सहित आम जनमानस की सहभागिता भी महत्वपूर्ण व अनिवार्य है। हर वर्ष लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा समुद्र में जमा हो रहा है हमारे समुद्री भाग में लगभग 500 खरब प्लास्टिक के टुकड़े इकट्ठे हो चुके हैं ।हमारे धरती पर रहने वाले वन्यजीवों व समुद्री जीव भी प्लास्टिक के प्रदूषण के कारण बहुत तेजी से विलुप्त होते जा रहे हैं गाय व अन्य पशुओं के लिए यह प्लास्टिक कचरा घातक है जलीय मछलियों के द्वारा प्लास्टिक कूड़े का खाने के रूप में प्रयोग करने से जब इन मछलियों का प्रयोग मानव अपने भोजन में करता है तो यह मछलियां मानव के लिए जहरीली साबित होती हैं प्लास्टिक का कूड़ा केवल जमीन को ही बर्बाद नहीं करता बल्कि पानी में बहाने पर इसके दुष्परिणाम होते हैं प्लास्टिक ऐसे पदार्थों को मिलकर बनता है जो हजारों वर्ष तक नष्ट नहीं होता प्लास्टिक इस्तेमाल होने के बाद जल स्रोतों से बहकर जाने से इससे निकलने वाला जहरीला पदार्थ जल में घोलकर इसे प्रदूषित कर रहा है मिट्टी में प्लास्टिक के दबने से धीरे-धीरे जहरीले पदार्थ छोड़कर यह मिट्टी को भी जहरीला बना देता है जिससे इसमें उगने वाली फसलें भी जहरीली हो जाती हैं जिसका प्रयोग करने से मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इस तरह वायु में भी प्लास्टिक का कचरा जलने से मिलने वाले जहरीले केमिकल मानव तथा जीव जंतुओं में कई प्रकार की सांस संबंधी बीमारियां उत्पन्न करती हैं प्लास्टिक रेपर को सड़ने में लगभग 30 वर्ष का समय लगता है जबकि प्लास्टिक की बोतलों को गलने में लगभग 450 वर्ष लगते हैं सामान्यता देखा गया है कि सफर करते समय लोग प्लास्टिक की बोतलों गिलासों चमचो और प्लेटो का इस्तेमाल करने के बाद इधर-उधर फेंकते हैं जो पर्यावरण को तो प्रदूषित करते ही हैं बल्कि इनमें प्रयोग किया गया पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है प्लास्टिक की बोतल के कार में रखे होने और उसमें रखे पानी के गर्म होने पर पीने से डाइअॉॉक्सिन, सल्फर डाइऑक्साइड जैसे गैसों के बनने से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का भय बना रहता है । कुछ लोग अपनी दुकान व अपने घर पर चाय या गरम सब्जियां प्लास्टिक की पन्नियों में मंगा लेते हैं गर्म चाय या सब्जी पन्नी में डालने से केमिकल चाय व सब्जी में चला जाता है जो बाद में लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाता है । चिकित्सक प्लास्टिक के ग्लास व पनियों में गर्म पदार्थों का सेवन ना करने की सलाह देते हैं ।प्लास्टिक पैकेजिंग से हमारी हरी सब्जियां भी प्रदूषित होती है इसलिए हरी सब्जियों को प्लास्टिक थैली में नहीं डालना चाहिए । हिमाचल सरकार के द्वारा 6 जुलाई 2018 से हिमाचल प्रदेश में थर्माकोल से बने कप प्लेट इत्यादि के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है प्लास्टिक के द्वारा बढ़ते हुए खतरे के मध्य नजर प्लास्टिक से बने चम्मच ,गिलास ,कटोरी ,फूड्सर्विस प्रतिबंधित किया गया है जिनका प्रयोग करना कानूनन जुर्म है ।प्लास्टिक का प्रयोग कम करने व न करने के लिए हमें कुछ उपाय करने की आवश्यकता है ताकि हम अपने आप को व आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणामों से बचा सकें । खरीदारी के लिए अपने साथ कपड़े का थैला प्रयोग करें । प्लास्टिक बोतलों के स्थान पर पुनः प्रयोग होने वाली बोतलों का प्रयोग करें पीने वाले पदार्थों में स्ट्रो का प्रयोग ना करें प्लास्टिक के चम्मच प्लेट कटोरी गिलास थर्माकोल के स्थान पर सार्वजनिक समारोह में पत्तों से बने पतलों व डोनो का प्रयोग करें। जंक फूड का बहिष्कार करके भी काफी हद तक प्लास्टिक का प्रयोग को रोका जा सकता है जब तक समाज का हर व्यक्ति प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को जानकर इसको ना नहीं कहेगा ,तब तक यह हमारे लिए व पर्यावरण के लिए एक चेतावनी है । इसमें सभी स्कूलों ,कॉलेजों, विश्वविद्यालयों ,व्यवसायिक संस्थानों ,पंचायतों,, एनजीओस, सभी विभागों ,सार्वजनिक समारोह में सभी व्यक्तियों को मिलजुल कर प्रयास करने की परम आवश्यकता है तभी हम प्लास्टिक पर पूर्ण विजय प्राप्त कर सकते हैं राष्ट्रीय सेवा योजना राज्य सलाहकार समिति का सदस्य होने के नाते हमने यह एक प्रयास किया है कि वर्ष 2020 में एनएसएस के राष्ट्रीय स्तर के व राज्य स्तर के प्रशिक्षण कैंपों व विशेष शिविरों में हम प्लास्टिक का पूर्ण बहिष्कार करेंगे और प्रतिबंधित कर करेंगे ताकि हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें हमारे एनएसएस के विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभाकर ना केवल प्लास्टिक के दुष्परिणामों के बारे में स्वयं जागरूक होंगे बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेंगे ताकि प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सके ।

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