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राज्य

राज्यपाल ने बेहतर परिणामों के लिए एक छत्र संस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया

हिमालयन अपडेट ब्यूरो | February 14, 2020 07:15 PM

शिमला,

 

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राज्य में शिक्षा, कौशल, तकनीकी शिक्षा और नवाचार के लिए ‘एक छत्र संस्था’ बनाए जाने पर बल दिया, ताकि बेहतर परिणामांे के लिए सभी संबंधित विभागों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

 

राजभवन में शिक्षा और कौशल विकास की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में बहुत कार्य किया जा रहा है, लेकिन इन विभागों में आपसी समन्वय की कमी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की दूसरे राज्यों में बहुत मांग है।

 

उन्होंने कहा कि व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त युवा काम के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जा रहे हैं, न ही उनके कौशल का उपयोग राज्य में किया जा सकता है। इसके अलावा प्रदेश में स्थापित उद्योगों को आवश्यक मानव संपदा नहीं मिल रही है, जिसका तात्पर्य है कि राज्य के युवाओं की उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान नहीं कर पा रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करके कौशल विकास में पैदा हो रहे अंतर को न केवल कम किया जा सकता है, बल्कि बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या का भी समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को नीतिगत निर्णय लेने में और केंद्र सरकार से राज्य को निधि प्राप्त होने में सहायता मिलेगी। उन्होंने इसके लिए एक एकीकृत योजना बनाए जाने की जरूरत है, जिसमें सभी के विचार, सहयोग, अनुभव की आवश्यकता होगी।

 

श्री दत्तात्रेय ने कहा कि यह वैश्विक प्रतियोगिता का समय है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के इस दौर में हमें शैक्षणिक, व्यावसायिक और कौशल में पूर्ण रूप से समृद्ध होना होगा, ताकि नए अवसरों का लाभ प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘कौशल भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब हमारे युवाओं के पास जरूरी कौशल होगा। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा, उत्साह, नवीकरण और सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोग करने की क्षमता है।

 

राज्यपाल ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली रोजगारपरक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचनात्मक निर्माण से समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए हमें बुनियादी स्तर पर कार्य करना होगा।

 

नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक प्रभावशाली कदम है। यह नए भारत के युवाओं में छह महत्वपूर्ण योग्यताओं मूल्य शिक्षा, रोजगारपरक शिक्षा, प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा, नवाचार, व्यवहार्यता और गतिशीलता की परिकल्पना करता है।

 

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि संपूर्ण भारतवर्ष में हिमाचल प्रदेश की शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि राज्य की साक्षरता दर केरल के बाद दूसरे स्थान पर है और प्रवासी मजदूरों को छोड़कर प्रदेश की साक्षरता दर लगभग 97 प्रतिशत है। उन्हांेने कहा कि राज्य को शिक्षा के क्षेत्र मंे श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया। अब राज्य सरकार गुणात्मक शिक्षा की तरफ ध्यान दे रही है।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ज्ञान, कौशल और रोजगार को जोड़कर नई दिशा दी जा रही है। इसके लिए एकीकृत प्रणाली विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कौशल के समन्वय से रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं।

 

राज्यपाल के प्रधान सलाहकार प्रोफेसर (डाॅ.) बी.एच. बृज किशोर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर कौशल विकास के माध्यम से रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है, इससे आर्थिकी भी सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में फल और सब्जियों के  विपणन की अपार संभावनाएं हैं। हम बड़े पैमाने पर जल विद्युत क्षमता का दोहन नहीं कर पा रहे हैं।  उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल उपलब्ध नहीं है।

 

उन्होंने चुनौतियों को संभावनाओं में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मात्र ज्ञान नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए ज्ञान का सृजन किया जा सकता है। उन्होंने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की।

 

इससे पूर्व, राज्यपाल के सचिव राकेश कंवर ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने राज्यपाल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हिमाचल प्रदेश के परिपेक्ष्य में कौशल विकास और शिक्षा नीति के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया।

 

इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा निशा सिंह, प्रधान सचिव शिक्षा के.के. पंत, प्रबन्ध निदेशक हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम रोहन चंद ठाकुर, चैधरी सरवण कुमार विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति ए.के. सरयाल, नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. परविन्द्र कौशल और हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के कुलपति एस.पी. बंसल ने भी कौशल विकास के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 

सचिव ग्रामीण विकास और पंचायती राज डाॅ. आर.एन. बत्ता, निदेशक उद्योग हंस राज, सरदार वल्लभभाई पटेल कलस्टर विश्वविद्यालय मण्डी के कुलपति डाॅ. सी.एल. चंदन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अधिष्ठाता अध्ययन प्रोफेसर अरविन्द कालिया, निदेशक तकनीकी शिक्षा शुभ करण सिंह, अटल चिकित्सा एवं शोध विश्वविद्यालय मण्डी के रजिस्ट्रार डाॅ. आशीष शर्मा, निदेशक उच्चतर शिक्षा डाॅ. अमरजीत शर्मा, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा रोहित जमवाल और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

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