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कविता

*सुन्दर मन की रचना करना*

प्रीति शर्मा असीम | September 16, 2020 03:18 PM

*सुन्दर मन की रचना करना*
*(चौपाई गजल)*

चंचल मन को नियमित करना।
सुन्दर मन की रचना करना।।

बेलगाम का यह घोड़ा है।
इसको सदैव कसते रहना।

इसे डराना अरु धमकाना।
भयाक्रांत करते रहना।।

करो समाजीकरण सुष्ठ नित।
समझाने की कोशिश करना।।

वैरागी बनने की शिक्षा-
देकर इसको गढ़ते रहना।।

हो अभ्यास निरन्तर पावन।
एक जगह पर इसको रखना।।

आध्यात्मिक हो नित्य प्रशिक्षण।
मन को पावन करते रहना।।

लौकिकता के मोहफाँस से।
इसे बचाते चलते रहना।।

काम क्रोध मद लोभ दरिन्दों।
से दूरी पर मन को रखना।।

सत्कर्मों में इसे लगाओ।
और लुभाते चलते रहना।।

मन में उत्तम संस्कार भर।
इसे सजाते चलते रहना।

उत्तम मानव उत्तम ग्रन्थों।
की संगति में इसको रखना।।

जड़ प्रधान यह क्लिष्ट निरंकुश।
इसको चेतन करते रहना।।

प्रेम,बुद्धि अरु सद्विवेक से।
सुन्दर मन की रचना करना।

रचनाकार:डॉ0रामबली मिश्र हरिहरपुरी
9838453801

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