Monday, November 30, 2020
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कविता

सुहाना

प्रीति शर्मा "असीम " | November 08, 2020 04:24 PM

*सुहाना*

पृष्ठभूमि है बहुत सुहाना।
मातृभूमि अत्यधिक लुभाना।।

पृष्ठभूमि में मात-पिता हैं।
आजीवन आवश्यकता है।।

मात-पिता से देह मिला है।
संस्कार अति स्नेह मिला है।।

मात-पिता मूल्यों के दाता।
सच्चाई-ईमान प्रदाता ।।

मात-पिता ही सर्व प्रदाता।
मनोवृत्ति मधु भाव विधाता।।

पृष्ठभूमि के मुख्य घटक हैं।
दिये प्रेम से सकल सबक हैं।।

दिल में बैठे मात-पिता है।
बने प्रेरणा मात-पिता हैं।।

मात-पिता के हम अनुगामी।
वही रचे जीवन आगामी।।

वही हमारे पृष्ठभूमि हैं।
दिये स्वर्ग सा मातृभूमि हैं।।

मातृभूमि अति प्रिय नमनीया।
वंदनीय नित नवल प्रणम्या।।

 

 
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