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राज्य

श्रीखंड कैलाश यात्रा विशेषःश्रीखंड कैलाश यात्रा के लिए प्रशासन ने की तेैयारियां मुक्कल

July 14, 2018 09:42 PM


आनीः

भारत देश की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्राओं में शुमार जिला कुल्लू के आनी वाहय सराज क्षेत्र के अंतर्गत छोटी काशी निरमंड में लगभग साढे अठारह हजार फुट की उंचाई पर स्थित श्रीखंड कैलाश की यात्रा इस वर्ष प्रशासनिक तौर पर 15 जुलाई से शुरू हो रही हैं।यात्रा को विधिवत रूप से शुरू करवाने के लिए प्रशासन व श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट ने तैयारियां मुक्कल कर ली हैं।इस कठिनतम यात्रा में कई प्राकृतिक कारणों से श्रद्वालुओं की हर वर्ष हो रही मौतें प्रशासन के लिए खासी मुश्किलें पैदा कर रही हैं,मगर श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट व प्रशासन ने इस वर्ष ऐतिहात के तौर पर कडे प्रवंध कर लिए हैं।बताते चलें कि 35 कि.मी. की कठिनतम पैदल ग्लेश्यिरयुक्त श्रीखंड कैलाश की यात्रा कुल्लू जिला के निरमंड से जाओं गांव तक वाहन द्वारा और उससे आगे यात्रा बेस कैम्प सिंहगाड तक पैदल पहॅंुचा जा सकता है। सिंहगाड से ही श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट व प्रशासन द्वारा यात्रा को विधिवत रूप से शुरू किया जाता है।यात्रा के लिए श्रद्वालुओं को हल्का खाने का सामान,पानी,छाता,ग्रिप वाले शूज,ग्लूकोस के पैकेट व लाठी के अलावा कुछ आवश्यक दवाएं ले जाना अनिवार्य होता है।यात्रा की असली थकान डंडाधार से शुरू होती है जो कालीघाटी पहुॅंचकर उतरती है।यात्रा में उससे आगे का थोडा मार्ग हांलांकि सुगम है ,मगर यात्री को सावधानी बरतना आवश्यक है।यात्री प्रातः सिंहगाड से चलकर मार्ग में एक दो ग्लेश्यिर को पार कर शाम को भीमडबार पहुॅंचते हैं। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए श्रीखंड सेवा ट्रस्ट द्वारा खाने पीने व रहने सहने की व्यवस्था उपलब्ध होती है।इससे आगे की यात्रा भी प्रातःकाल ही करना उचित होता है। यहां से आगे एक बडा ग्लेश्यिर पार करना जोखिमपूर्ण है,जिसे सावधानीपूर्वक पार करना ही ठीक रहता है।आगे पार्वति बाग से गुजरते यात्री नैनसरोवर पहुॅंचता है,यहां बर्फ से जमे पानी को तोडकर स्नान कर अथवा छिंटे डालकर श्रद्वालु श्रीखंड कैलाश की सवसे कठिनतम यात्रा की ओर अग्रसर होते हैं।इस मार्ग को वडी सावधानी से पार करना की समझदारी है।उॅंचाई की ओर बढते हुए धीरे धीरे आक्सीजन की कमी भी श्रद्वालु महसूस कर सकता है और जडी बुटियों की जहरीली गैस का नशा भी चढ सकता है।ऐसे में विश्राम कर ग्लोकोज लेने से शरीर को आराम और उर्जा मिलती है।श्रद्वालुओं को मौसम का ध्यान रखते हुए प्रातः जल्दी ही श्रीखंड कैलाश पहुॅंचकर दर्शन करने चाहिए।
क्या कहता है प्रशासनः-श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम आनी चेत ंिसह ने बताया कि श्रीखंड कैलाश यात्रा को प्रशासनिक तौर पर 15
जुलाई से शुरू किया जाएगा।यात्रा को विधिवत रूप से शुरू करने और मार्ग में श्रद्वालुओं को हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए प्रवंधों को अंतिम रूप दे दिया गया है।उन्होंने बताया कि यात्रा में भिन्न भिन्न स्थानों पर राहत एवं वचाव कार्य के लिए पुलिस व रिजर्व बटालियन के जवान तैनात रहेगें।उन्होंने बताया कि श्रद्वालुओं व यात्रियों की सुविधा के लिए पार्वतिबाग तक प्रशासन की रेस्क्यू टीम तैनात रहेगी।एसडीएम ने यात्रा में जाने वाले भक्तों से पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए रखने और यात्रा की पवित्रता को बनाए रखने के लिए मार्ग में गंदगी न फैलाने का आहवान किया है।
23 जुलाई को ही निरमंड के दशनामी अखाडा से शुरू होगी छडी यात्रा
इस वर्ष 23वीं छडी यात्रा होगी रवाना
श्रीखंड कैलाश यात्रा के लिए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी छोटी काशी निरमंड के दशनामी जूनाअखाडा से माता अम्बिका व दतात्रेय स्वामी की छडी यात्रा भी शुरू होगी।यह छडी यात्रा 23 जुलाई को दशनामी जूना अखाडा के बाबा अशोक गीरी जी महाराज की अगुवाई में विधिवत पूजा अर्चना के बाद पारम्परिक वादय यंत्रों की गूंज के साथ रवाना होगीं। श्रीखंड छडी यात्रा समिति के अध्यक्ष डीआर कश्यप ने बताया की इस छडी यात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से विभिन्न अखाडों के साधु महात्माओं का जत्था और शिव भक्तों की टोली शामिल होगी। उन्होंने  बताया कि छडी यात्रा 27 जुलाई को गुरू पुर्णिमा की पावन बेला पर श्रीखंड कैलाश पहुॅंचकर भगवान श्रीखंड महादेव के दर्शन करेगी और उसी दिन वापिस लौटकर 30 जुलाई को निरमंड के जुनाअखाडा पहॅुंचेगी।

 
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