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धर्म संस्कृति

योगवशिष्ठ और साधक के योग विकास के चरण  (भाग 1)

डॉ विनोद नाथ | July 06, 2022 07:57 AM

आदेश आदेश !!!

योगवशिष्ठ हिंदू धर्म के प्रसिद्ध दार्शनिक और प्रभावशाली ग्रंथों में से एक है जिसका श्रेय महर्षि वाल्मीकि को जाता है। इस ग्रंथ के अन्य नाम हैं: महारामायण, अर्शरामायण, वशिष्ठ रामायण, योगवशिष्ठ और ज्ञानवशिष्ठ। योगवशिष्ठ में वेदांत, योग, सांख्य, शैवी सिद्धांत, जैन धर्म और बौद्ध धर्म के तत्व शामिल हैं जो इसे एक हिंदू पाठ को उत्कृष्ट बनाते हैं। पाठ में लगभग 29289 श्लोक हैं। पाठ के संक्षिप्त संस्करण को लघु योगवशिष्ठ कहा जाता है और इसमें 6000 श्लोक हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो योग वशिष्ठ का स्थान साधकों के लिए एक सर्वोपरि ग्रंथ के रूप में है। यह ग्रंथ अपने आप में अनेक रहस्य और गुढ सिद्धांतों को समाए हुए हैं जिसमें भारतीय दर्शन और समस्त मान्यताओं का एक अनूठा संगम मिलता है । यह भारतीय संस्कृति और चिंतन का एक प्रतिनिधि ग्रंथ है महर्षि वशिष्ठ ने जो ज्ञान अपनी साधना से प्राप्त किया यह उसका संग्रह है इस ग्रंथ का मूल श्रेय महर्षि वाल्मीकि को दिया जाता है जो कि जन कल्याण के लिए बहुत ही अधिक गुण तात्विक विज्ञान को अपने आप में समेटे हुए हैं।

इस ग्रंथ की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसमें आध्यात्मिक बिंदुओं को बहुत अच्छे से प्रतिपादित किया गया है जिनमें पारब्रह्म, ब्रह्म जगत, बुद्धि अहंकार शरीर मृत्यु पुनर्जन्म का विश्लेषण बहुत ही सराहनीय है इसमें साथ-साथ सांसारिक बंधनों, जीवन मुक्ति और मोक्ष के प्रकरणों पर भी विशेष बल दिया गया है और मोक्ष प्राप्ति के विभिन्न उपायों पर  दृष्टांत बहुत ही सराहनीय ढंग से प्रस्तुत किया गया है इसलिए यह योग साधकों के लिए बहुत ही प्रामाणिक ग्रंथ बन जाता है जिसकी शुरुआत आत्मबोध से हो सकती है इस ग्रंथ में आतंकवाद और व्यक्ति के आत्म उन्नति के ऊपर बहुत बल दिया गया हैi

 इसमें साधारण आसन और हठयोग जैसी कोई क्रिया नहीं है न मंत्र जाप न पूजा न प्रार्थना किंतु इसमें पूर्णतया साधक के आध्यात्मिक मार्ग को बहुत अच्छे से विवेचन किया गया है जिसका की मुक्ति और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए बहुत बड़ा महत्व हैI भारतीय अध्यात्म जगत में क्योंकि मुक्ति और मोक्ष का सर्वाधिक महत्व है इसलिए इस ग्रंथ का हर एक देश काल और भूभाग में अपना एक विशिष्ट स्थान है मैं आगे के आने वाले कुछ भागों में इस ग्रंथ के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करूंगा आशा है आप सभी इस चर्चा को सहृदय स्वीकार करेंगे। 

डॉ विनोद नाथ (योगी राम के १८)

चेयरमैन श्रीनाथ योग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (रजि.)

पूर्ण जानकारी के लिए  नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ...

 

क्रमशः

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