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आनी के देहुरी में हुआ दो भाई वहन स्वरूप देवी देवताओं का आलौकिक मिलन

ब्यूरो हिमालयन अपडेट | October 01, 2022 06:47 PM
आनी,
 
आनी के सेब बहुत क्षेत्र ग्रीन वैली जाबन की अधिष्ठात्री देवी देहुरी पच्छ्ला दुर्गा के देवालय प्रांगण में गुरुवार व शुक्रवार को शरद नवरात्रों के पावन अवसर पर आस्था का खूब सैलाब देखने को मिला। देवालय में दो भाई बहन स्वरूप देवता निरमण्ड  उरटू के आराध्य  चम्भू देवता तथा  आनी देहुरी की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा पच्छ्ला का लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद  दिव्य व आलौकिक मिलन हुआ।दो भाई वहन स्वरूप देवताओं के भावपूर्ण दर्शन का दीदार पाने व उनका आशीर्वाद लेने के लिए मन्दिर में हजारों भक्तों ने अपनी हाजरी भरी।देवी माता पच्छ्ला दुर्गा मंदिर कमेटी के प्रधान धनी राम ठाकुर व भक्त ख्याले राम ठाकुर ने बताया कि माता अम्बिका के चार पुत्र चम्भू देवता हैं और सात देवी पुत्रियां हैं, जिनका पुराणों में भी उल्लेख है।उन्होंने बताया कि चार चम्भू भाई देवताओं में निरमण्ड उरटू के चम्भू देवता सबसे बड़े भाई हैं, जबकि सात देवी स्वरूपा वहनों में आनी के जाबन क्षेत्र देहुरी की अधिष्ठात्री देवी माता पच्छ्ला सबसे छोटी बहन है।कमेटी प्रधान धनी राम ठाकुर व भक्त केआर ठाकुर ने बताया कि माता पच्छ्ला दुर्गा के देवालय के चहुँओर स्थानीय लोगों द्वारा अवर्णीय गंदगी फैलाई जा रही थी, जिससे देवी माता रूष्ट होकर अपने बड़े भाई देवता उरटू चम्भू के पास चली गई थी।माता के इस कोप से क्षेत्र में क़ई तरह की व्याधियां घटने लगी।जिसके फलस्वरूप मन्दिर से जुड़े कार कारिंदे अपनी ईष्ट को मनाने के लिए उरटू चम्भू देवता के पास क्षमा याचना को लेकर गए  और अपनी अधिष्ठात्री देवी माता पच्छ्ला को अपने देवालय लौटने की गुहार लगाई।कार करिन्दों ने देवता उरटू चम्भू को भरोसा दिलाया कि ,माता पच्छ्ला के सम्मान जो किसी कारणवश जो ठेस पहुंची है, उसके लिए सभी कार करिंदें क्षमा प्रार्थी हैं और उसके सुधार के लिए वे प्रयासरत रहेंगे। देवता चम्भू के पुजारी हरीश शुक्ला ने बताया कि   झाड़े के द्वारा चम्भू देवता ने शरद नवरात्रे में 29 सितंबर का दिन अपनी बहन पच्छ्ला दुर्गा को देवालय विदा करने का मुकर्रर किया।जिसके तहत माता पच्छ्ला लगभग सात माह के लंबे अंतराल के बाद 29 सितंबर को पूरी देव परम्परा के अनुसार  बड़े भाई उरटू  चम्भू संग अपने देवालय लौटी।माता पच्छ्ला दुर्गा के पुजारी भोला दत्त शर्मा ने बताया कि माता के देवालय लौटने पर मन्दिर के कारकूनों तथा मन्दिर कमेटी ने भाई बहन देवताओं का पूरी देव परम्परा अनुसार भव्य स्वागत किया और महिलाओं ने मंगलगीत गाकर देवताओं का अभिनन्दन किया। देवता स्वरूप भाई बहन के इस दिव्य व अलौकिक मिलन का दीदार पाने को हजारों भक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ा।सभी भक्तों ने गुरुवार व शुक्रवार को देवताओं के समक्ष शीश नवाकर सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया।इस आयोजन में मन्दिर कमेटी की ओर सभी भक्तों के लिए दो दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने लंगर का प्रशाद ग्रहण किया।इस मौके पर मन्दिर कमेटी के प्रधान धनी राम ठाकुर.कारदार लीला चन्द.भडारी जयराम सिंघा.महासचिव टीकम शैली. सदस्य बाल किशन. संतोष ठाकुर. चौकीदार शेर सिंह.पूर्ण चन्द व सन्नी.पेऊकी नरोत्तम ठाकुर.गूर अनूप राम.पुजारी अनूप राम.दौलत राम शर्मा.बी.ड़ी शर्मा. मुकेश शर्मा.प्रकाश चन्द.देवता चम्भू के कारदार राम दास ठाकुर व पुजारी हरीश शुक्ला सहित अन्य क़ई करकून व देवलू मौजूद रहे।
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