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राज्य

निरमंड की एकल महिला कमला बनी बेमिसाल बागवान

February 04, 2019 06:55 PM

रामपुर बुशहर, 

रामपुर बुशहर के समीप लगती निरमंड तहसील की महिला बागवान कमला ने बागवानी के क्षेत्र में वह कर दिखाया जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होता है। एकल महिला होते हुए भी उन्होंने अपने गांव सभौवा नावा में करीब एक हजार पौधों का सेब बागीचा तैयार किया है जिसमें करीब साढ़े तीन सौ पौधे आधुनिक नई प्रजाति के है। इनमें रेड चीफ, सुपर चीफ, आरगन स्पर प्रमुख हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि महिलाएं भी बागवानी क्षेत्र में किसी से कम नहीं यदि मन में कुछ करने का पक्का जज्बा हो। कमला बताती हैं कि सेब की आधुनिक प्रजातियां काफी लाभदायक हैं क्योंकि इस प्रजाति के सेब का रंग एक समान और साइज में बड़ा  होता है तथा जुलाई के आखरी सप्ताह में फसल आ जाने से मुनासिब दाम भी मिल जाता है।

कमला ने बागवानी के गुर अपने स्व. पति से सीखे हैं जो कि बागवानी विश्व विद्यालय नौणी में एक अधिकारी थे। पति की मौत के बाद सारी जिम्मेवारी उन्हीं पर आ पड़ी और इस जुझारू महिला ने किसी की बिना सहायता से शुरु कर दिया बागवानी का काम। कमला अपने बागीचे का सभी काम स्वयं ही करती हैं पौधों के लिए गढ्ढे बनाना, पौधे रोपना, स्प्रे्, प्रूनिंग से लेकर ग्रेडिंग पैकिंग का सभी काम वे बाखूबी बिना किसी की सहायता से निपटा लेती हैं। केवल सेब ढुलाई के लिए उन्हें मजदूरों पर निर्भर रहना होता है। उनका कहना है कि आजकल लेबर का मिलना मुश्किल है यदि मिलती भी है तो भारी भरकम दिहाड़ी देनी पड़ती है।

कमला अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गई है आसपास की अन्य महिलाएं अब उनसे जानकारी लेकर बागवानी के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। इस जुझारु महिला बागवान का सबके लिए एक ही संदेश है कि लोग दूसरे के ऊपर निर्भर न रह कर अपना काम खुद ही करें खास कर महिलाएं आगे आएं। अपना अधिकांश काम स्वयं करने से धन की बचत तो होगी साथ ही आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा मिलेगी। अब उनकी देखा देखी आसपास की खाली पड़ी जमीनों पर लोग सेब की खेती करने के लिए उनसे गुर सीखने आते हैं जो उन्हें जानकारी तो देती हैं साथ ही उत्साहित भी करती हैं।

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