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शान ए कुल्लू बने हितेन्द्र साहसी

 
November 12, 2018 09:54 PM


 
आनी,
आनी के रघूपूर क्षेत्र से संबंध रखने वाले संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हिमाचली लोक गायक हितेन्द्र साहसी को शान ए कुल्लू 2018 के अवार्ड से नबाज़ा गया है ! यह सम्मान उन्हे रविवार को कुल्लू मे प्रदान किया गया ! हिमाचल एकता मंच द्बारा बिभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों को उनके उत्कृष्ठ कार्य के लिए सम्मानित किया गया जिस मे हिमाचली लोक गायक हितेंद्र साहसी ने यह अवार्ड संगीत के क्षेत्र मे बेहतर काम करने के लिए नवाज़ा गया है ! 
शान ए कुल्लू में अपना चयन पाकर बह बहुत हर्षित है व इस  पुरस्कार को पाकर लोक गायक हितेंद्र साहसी  अपने आप को गोरवान्वित भी महसूस कर रहे है ! हितेन्द्र साहसी पिछले 10 वर्षों से संगीत के क्षेत्र  में है।।इस बक्त उन के  मार्किट में 100 से अधिक गीत हैं।उनका कहना है कि  बचपन से ही संगीत का शौक रोम रोम में भरा था।।स्कूल में भी गायन प्रतियोगिता में अबल आते  थे । 2009 में सुप्रसिद्ध संगीतकार सुरेन्द्र नेगी के बैनर तले
उन्होने  अपनी पहली एलबम  ' खुशी के आंसू'  मार्किट में उतारी जिसके गीत ओ रीना तेरे बिना , ओ मेरी मनुए , हंडे मेरी साहिब , ओ प्यारी मंजुए , मानदासी हो साथ देउँ तेरा उमरा , कीर्ति की नाती , माहरे हो ऋषिया आदि गीत मार्किट में बहुत ज्यादा हिट हुए। हितेंद्र ने कहा कि वह सूत्रधार कला संगम से भी लगातार जुडे रहे ऑर  संगीत की बारीकियों को सीखते रहे तब से  लगातार संगीत के क्षेत्र में मेहनत कर रहे है । 2010 मे महान संगीतकार एसडी कशयप के बैनर तले सांसो की डोर नामक एलबम  निकाली जिसके गीत भी मार्किट में बहुत ज्यादा हिट हुए। मामा री भांजिये, बिंदिये जिउ नी लगदा केले , आदि गीत हिट हुए। गीतो  की माला लगातार पिरोने के साथ साथ अभी हाल ही मे जानू नामक एलबम  मार्किट में आने जा रही है।
अब तक हितेंद्र हिमाचल के अंतरराष्ट्रीय स्तर ब राज्य स्तरीय मेलों में अपना प्रोग्राम स्टार नाईट में देता आ रहे है ।प्र उन्हे इस बात का भी मलाल है कि  अभी अपने गृह क्षेत्र के जिला स्तरीय आनी मेले मे मंच नही मिला ।।मन में विश्वास है कि मेहनत करूँगा एक दिन संगीत के क्षेत्र में अपने सिराज  आनी का नाम रोशन करूँगा जैसे आज शान ए कुल्लू आवर्ड पा के अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं और कहीं न कही अपनी आनी का नाम भी रोशन कर रहा हूं।।।बचपन में मेरे पापा हरपल गुंगनाते रहते थे।जिस से मुझे बहुत ज्यादा प्रेरणा मिलती गई।।मतलब मेरा परिवार हमेशा मुझे संगीत के लिये प्रेरित करता गया।।

संगीत के सफर में महान गायक ठाकुर दास राठी का भी एक अहम भूमिका रही है  क्योंकि उन्होंने हरदम मुझे इस क्षेत्र में आगे किया  किया है बह  मेरे लिये गुरु भी हैं और दोस्त भी हैं

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