Monday, September 27, 2021
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कविता
विकास के नाम पर बसा ली कंक्रीटो की नगरी : डाॅ उर्मिला सिन्हा इतना पुराना हो गया यह शहर :सुनीता श्रीवास्तव 'जागृति जड़ से जुड़ना भूल गया और मानव नभ में उडा़ फिरे :मुकुट अग्रवाल 'भावुक' शहर के रंग : डॉ रजनी शर्मा 'चंदा' हाँ सच में हमने, बहुत तरक्की कर ली : डॉ. मधु मिश्रा रास नहीं आता कंक्रीट का शहर इतिहास भूल कर कैसे खुद को सँवारे : सीमा सिन्हा मैत्री  अनेकों पेड़ों की बलि पर : माया शर्मी (नटखटी) शहर का मंजर : दीपक कुमार डिम्पज क्षण की प्रलय कर प्रकृति तो संवर जाएगी :बिंदु प्रसाद रिद्धिमा याद आता है वो बचपन का जमाना: अनु ठाकुर बूंद -बूंद करो संचय :डा ० अर्चना मिश्रा शुक्ला रिमझिम रिमझिम बरखा बहार :रीना सिन्हा बारिश की बूंदे अमृतधारा: प्रदीप कुमार द्विवेदी बारिश की बूंदों से नवजीवन का संचार- वरिन्दर जीत कौर पहली बारिश का खूबसूरत एहसास:ऐश्वर्या संपन्ना बारिश की पहली फुहार:डॉ. मधु मिश्रा बारिश की बूंदों में खुशियां :सीमा सिन्हा मैत्री लोकडाउन तुम मुझ मैं मेरी माँ ईश्वर का न्याय स्त्री की व्यथा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कमलीना फाउंडेशन बंगलुरू के तत्वाधान में ऑनलाइन काव्य सम्मेलन आयोजित बासंती व फगुआ के रस से सराबोर कविताओं की रंगारंग गोष्ठी संपन्न पं.तिलकराज शर्मा स्मृति न्यास द्वारा वार्षिक सम्मान समारोह आयोजित ' हे मां शारदे' वीणा वादनी वर दे,वर दे- नमन करूं वंदन करूं मां ,करूं आराधना आपकी। मां शारदे तुमने मेरे जीवन को वह सौगात दी भरदो भण्डार आज ज्ञान का हे शारदे माँ वहम