Tuesday, May 24, 2022
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कविता
एक दिन

एक दिन वफ़ा , तुम को भी रास आएगी

कुछ भी नही

न कोई अपना , न कोई पराया।

मेरे शहर में ;राजीव डोगरा

आओ!कभी मेरे शहर में , तुमको  हर एक शख्स़ से , मोहब्बत करना सिखाए।

दुर्गे माँ नवरात्रि में, आतीं हैं हर बार ;गीता चौबे गूँज लाल भगत सिंह भारत माँ का हरदम ही यूँ बोला. ;राजपाल यादव आइए होली का हुड़दंग कर लें ; सुधीर श्रीवास्तव छूटा वो घर , वो आँगन ;रीना सिन्हा कोई फर्क नहीं। कृष्ण कन्हैया खेलें होरी; रुणा रश्मि दीप्त होली खेलूं रे संग नन्दलाल ; डॉ विनय कुमार सिंह रंग दे मोहे गुलाल तेरे इश्क को;राधे मंजूषा कलम हाथ में थाम कर,लिखना है अपनी जज़्बात; विभा वर्मा वाची लिए लिखनी हाथ में हूँ सोच रही मैं आज ; निर्मला कर्ण मुझे बनाना है आशियाने का डिजाइन ; अनिता निधि बहुत दिनों से मैंने तो कुछ लिखा ही नहीं ; पूनम सिन्हा "प्रीत" कभी कभी खुद को खुश रखने के लिए अकेला रहना भी जरूरी है ;अनिता निधि थोड़ी सी नादान हैं थोड़ी सी अनजान हैं; नीता शेखर विषिका कह दे इसे दीवानगी या हमारी रवानगी ; सुनीता श्रीवास्तव, सब्बू वह अकेला गाछ ; अनिता रश्मि लिखने को तो बहुत कुछ है मगर, सोचती हूं ;माया शर्मा (नटखटी) उंगली में थामे पेंसिल क्या लिखूं, क्या उकेरू ;डाॅ उर्मिला सिन्हा ममता की तस्वीर उकेरूँ, निश्छल प्यार लुटाती अम्मा ;गीता चौबे गूँज अकेलापन क्या है? उम्मीदों का टूटना ; राधे मंजूषा उठो-उठो जागो-जागो,हुआ सबेरा, हुआ सबेरा; विभा वर्मा वाची जल्दी-जल्दी बस्ता लेकर , विद्यालय की ओर भागो जी ; शोभा प्रसाद मन के सच्चे दिल से भोले भाले ये बच्चे; डॉ.लाला पिंजरबद्ध पखेरु को जब, खुला आसमां मिल जाये ;दीन दयाल शुक्ला अठखेलियां- ‌‌ शब्दों की ; डॉ० हरेन्द्र सिन्हा यातायात के नियमों का, उलंघ्घन कभी न करता हूँ ; डॉ. मधु मिश्रा ये प्यारे परिंदे ; अनिता निधि बचपन खुलकर फिर जी रहा ; रश्मि सिंह हंसते खिलखिलाते पहुंचे स्कूल हम ; ऐश्वर्या संपन्ना नन्हे मुन्ने ये नौनिहाल ; रीना सिन्हा