Thursday, January 20, 2022
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कविता
एक शाम

कुछ बिखरे हुए जज्बात
तेरे नाम लिखूंगा।

संजीव-नी।।

जख़्म ऐ दिल मत दिखा जमाने को, कि तूने समझा ही क्या जमाने कोl

संजीवनी |

फिर दिया तूने निर्झरिणी सा जल, जलप्रपात, झरने, नन्ही  मछलियां,

नया साल

शिकस्त मिली हैं हमें बहुत पिछले कुछ वर्षों से नए साल जय विजय का एक नया दौर लेकर आया

राम

ध्यान-ध्यान तुम करते हो तुम ज्ञान के लायक भी नहीं।

गांधी जयंती पर विशेष, गांधी तेरे देश में

काट दी सत्य कहने मनीषा की जुबान,
तोड़ दी उसकी रीढ़, दर्द से चीखती रही बेचारी।

हरी सब्जियां सेहत का खजाना :डाॅ उर्मिला सिन्हा इन बूंदों को देख एक तलब है जागी : सुनीता श्रीवास्तव "जागृति तडका लगाये,खुब खाये : अर्चना गोन्नाड़े एक गरम चाय की प्याली : ऐश्वर्या संपन्ना तोरी हो, भिंडी हो ,या हो करैला चलो झट बाजार लेकर थैला : सीमा सिन्हा मैत्री देखो प्रकृति भी ललचाई, वह भी प्याला चाय का लाई : मीरा द्विवेदी वर्षा "शचि" खूब सँवर थाली में बैठीं, अद्भुत अंदाज निराला : गीता चौबे गूँज बेजोड़ है तेरा मेरा यह साथ :आभा चौहान करेले टिंडे और भिंडी की तरकारी : रीना सिन्हा ये बारिश और गर्म चाय की प्याली: रीना सिन्हा सांभर : प्रेमपाल हरी सब्जियों का नित करें प्रयोग: डॉ. मधु मिश्रा ऊँची इमारतों की भीड़ में :रीना सिन्हा विकास के नाम पर बसा ली कंक्रीटो की नगरी : डाॅ उर्मिला सिन्हा इतना पुराना हो गया यह शहर :सुनीता श्रीवास्तव 'जागृति जड़ से जुड़ना भूल गया और मानव नभ में उडा़ फिरे :मुकुट अग्रवाल 'भावुक' शहर के रंग : डॉ रजनी शर्मा 'चंदा' हाँ सच में हमने, बहुत तरक्की कर ली : डॉ. मधु मिश्रा रास नहीं आता कंक्रीट का शहर इतिहास भूल कर कैसे खुद को सँवारे : सीमा सिन्हा मैत्री  अनेकों पेड़ों की बलि पर : माया शर्मी (नटखटी) शहर का मंजर : दीपक कुमार डिम्पज क्षण की प्रलय कर प्रकृति तो संवर जाएगी :बिंदु प्रसाद रिद्धिमा याद आता है वो बचपन का जमाना: अनु ठाकुर बूंद -बूंद करो संचय :डा ० अर्चना मिश्रा शुक्ला रिमझिम रिमझिम बरखा बहार :रीना सिन्हा बारिश की बूंदे अमृतधारा: प्रदीप कुमार द्विवेदी बारिश की बूंदों से नवजीवन का संचार- वरिन्दर जीत कौर पहली बारिश का खूबसूरत एहसास:ऐश्वर्या संपन्ना बारिश की पहली फुहार:डॉ. मधु मिश्रा बारिश की बूंदों में खुशियां :सीमा सिन्हा मैत्री